उर्दू शायरी · ग़ज़ल

is Thahraw se pahle bataen kaise rahte the

इस ठहराव से पहले बताएँ कैसे रहते थे

اس ٹھہراؤ سے پہلے بتائیں کیسے رہتے تھے

शायर: Qamar Abbas Qamar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इस ठहराव से पहले बताएँ कैसे रहते थे
हम दरिया थे अपनी मौज में बहते रहते थे

उस के ग़लत रवय्ये पर चुप रहना पड़ता था
लड़ सकते थे उस से मगर हम सहते रहते थे

उस ने धोका दे के बताया दुनिया कैसी है
वर्ना हम क्या ख़ाक समझते जैसे रहते थे

उस बस्ती में एक ग़ज़ब का मेला लगता था
वो आती रहती थी हम भी आते रहते थे

इन आँखों में ख़्वाबों वाले जुगनू रौशन थे
इन चेहरों पे अक्सर फूल बरसते रहते थे

दिल-आज़ारी करना अपना काम था दुनिया में
जो कुछ भी जी में आ जाता कहते रहते थे