उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye saneha hai bhala aur kis ke sar jaana

ये सानेहा है भला और किस के सर जाना

یہ سانحہ ہے بھلا اور کس کے سر جانا

शायर: Vijay Sharma7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये सानेहा है भला और किस के सर जाना
हवा का वक़्त से चलना फ़ज़ा ठहर जाना

नई नहीं है ये तन्हाई मेरे हुजरे की
मरज़ हो कोई भी है चारागर से डर जाना

यही है ज़ीस्त की पहचान मौत से पहले
तमाम तरह की तन्हाइयों से भर जाना

तमाम उम्र गुज़रना सियाह लम्हों से
फिर एक शाम नई रौशनी से भर जाना

किसी के ख़्वाब से चलना किसी के ख़्वाब तलक
किसी की जागती आँखों में घुट के मर जाना

अजीब रंज है साँसों का आज धड़कन से
कि इक नफ़स के लिए हर नफ़स है मर जाना

तमाम शौक़ से काटे गए दरख़्त यहाँ
तमाम दर्द से है आदमी को भर जाना