उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jis bhi jagah dekhi usne apni taswir haTa li thi

जिस भी जगह देखी उस ने अपनी तस्वीर हटा ली थी

جس بھی جگہ دیکھی اس نے اپنی تصویر ہٹا لی تھی

शायर: Vijay Sharma5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जिस भी जगह देखी उस ने अपनी तस्वीर हटा ली थी
मेरे दिल की दीवारों पर दीमक लगने वाली थी

एक परिंदा उड़ने की कोशिश में गिर गिर जाता था
घर जाना था उस को पर वो रात बहुत ही काली थी

आँगन में जो दीप क़तारों में रक्खे थे धुआँ हुए
हवा चली उस रात बहुत जब मेरे घर दीवाली थी

इक मुद्दत पर घर लौटा था पास जब उस के बैठा मैं
मुझ में भी मौजूद नहीं थी वो ख़ुद में भी ख़ाली थी

'अर्श' बहारों में भी आया एक नज़ारा पतझड़ का
सब्ज़ शजर के सब्ज़ तने पर इक सूखी सी डाली थी