उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi sukhe hue shajar sa hun

किसी सूखे हुए शजर सा हूँ

کسی سوکھے ہوئے شجر سا ہوں

शायर: Vijay Sharma6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी सूखे हुए शजर सा हूँ
एक लम्हे में उम्र भर सा हूँ

तुम हँसो और मुस्कुराऊँ मैं
शम्स तुम हो तो मैं क़मर सा हूँ

कोई मुझ में नज़र नहीं आता
एक वीरान रहगुज़र सा हूँ

वक़्त इक झील सा हुआ मुझ में
कोई ठहरा हुआ सा अर्सा हूँ

तुझमें कितनी नमी चली आई
जब से तेरी ज़मीं पे बरसा हूँ

तुम मिरी ज़िंदगी के मालिक 'अर्श'
और मैं ज़िंदगी को तरसा हूँ