उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baaton baaton mein hi unwan badal jate hain

बातों बातों में ही उनवान बदल जाते हैं

باتوں باتوں میں ہی عنوان بدل جاتے ہیں

शायर: Vijay Sharma4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बातों बातों में ही उनवान बदल जाते हैं
कितनी रफ़्तार से इंसान बदल जाते हैं

चोरियाँ हो नहीं पातीं तो यही होता है
अपनी बस्ती के निगहबान बदल जाते हैं

कोई मंज़िल ही नहीं ठहरें मुरादें जिस पर
वक़्त बदले भी तो अरमान बदल जाते हैं

उस के दामन से उमीदों के गुलों को चुन कर
ज़िंदगी के सभी इम्कान बदल जाते हैं