उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye qudrat ke hathon ke dilkash sanam

ये क़ुदरत के हाथों के दिलकश सनम

یہ قدرت کے ہاتھوں کے دل کش صنم

शायर: Parkash Nath Parvez7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये क़ुदरत के हाथों के दिलकश सनम
कहीं देख कर बुत न बन जाएँ हम

मिरा दिल बड़ी क़ीमती चीज़ है
मुक़ीम इस में है एक आलम का ग़म

मोहब्बत से ख़ाली नहीं कोई दिल
मोहब्बत हर इक दिल में है बेश-ओ-कम

सितम को करम कह रहा है जहाँ
ज़रा देखिए तो जहाँ का सितम

अगर दिल में रंगीनियाँ ही न हों
तो सैर-ए-जिनाँ भी है सैर-ए-अदम

मेरे ज़ेहन में हैं कई मंज़िलें
अभी मुतमइन हों न मेरे क़दम

हुए नामवर हासिदों के तुफ़ैल
जहाँ में थे 'परवेज़' गुम-नाम हम