उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye mukarrar aur ye irshad zindabaad

ये मुकर्रर और ये इरशाद ज़िंदाबाद

یہ مکرر اور یہ ارشاد زندہ باد

शायर: Chandra Shekhar Varma9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये मुकर्रर और ये इरशाद ज़िंदाबाद
शे'र को समझे बिना दी दाद ज़िंदाबाद

क़ैस राँझा रोमीयो फ़रहाद ज़िंदाबाद
इश्क़ में जो भी हुआ बर्बाद ज़िंदाबाद

दिल को मेरे कर रही आबाद ज़िंदाबाद
तू है ज़िंदा बाद तेरी याद ज़िंदाबाद

एक तिनके ने बचा ली डूबते की जान
है बहुत छोटी तो क्या इमदाद ज़िंदाबाद

है क़फ़स इस जिस्म का माना बहुत मज़बूत
फिर भी ताइर रूह का आज़ाद ज़िंदाबाद

भीड़ का हिस्सा हो तुम तो भीड़ के ही साथ
ज़ोर से बोलो हमारे बाद ज़िंदाबाद

बख़्श दी जाएँ हमारे क़ातिलों की जान
आख़िरी मक़्तूल की फ़रियाद ज़िंदाबाद

देखिए बदले हैं कैसे बाग़ के हालात
बुलबुलें भी कहती हैं सय्याद ज़िंदाबाद

यूँ तो बिल्कुल राएगाँ थी आप की तक़रीर
पर इसी तक़रीर की रूदाद ज़िंदाबाद