उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bujha Dale hawa ne shahr ke sare diye par

बुझा डाले हवा ने शहर के सारे दिए पर

بجھا ڈالے ہوا نے شہر کے سارے دیے پر

शायर: Chandra Shekhar Varma5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बुझा डाले हवा ने शहर के सारे दिए पर
उसे अफ़सोस रत्ती-भर नहीं अपने किए पर

ये मत पूछो कि कितनी मर्तबा हम ने निकाला
तुम्हारे ख़त नहीं आने का ग़ुस्सा डाकिये पर

वो जब तक उड़ रही थी हो नहीं पाया ये मुमकिन
है चिड़िया अब क़फ़स में चैन से गिन लीजिए पर

सुनी है जब से हम ने भेड़िया आया कहानी
यक़ीं इंसान पर कम है ज़ियादा भेड़िये पर

निकाली जाएगी अब खाल इस की देखना तुम
मिला है जो तुम्हारा बाल मेरे तौलिए पर