उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek to patthar uchhaala ja raha hai

एक तो पत्थर उछाला जा रहा है

ایک تو پتھر اچھالا جا رہا ہے

शायर: Chandra Shekhar Varma7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक तो पत्थर उछाला जा रहा है
उस पे शीशा भी सँभाला जा रहा है

घर अँधेरों का खंगाला जा रहा है
रात में सूरज निकाला जा रहा है

फूल तो मजबूरियों में खिल रहे हैं
बाग़ में काँटों को पाला जा रहा है

फ़ैसला आया है बरसों बाद वो ही
फ़ैसले को कल पे टाला जा रहा है

आप की तब तक ही ज़िंदाबाद होगी
पेट में जब तक निवाला जा रहा है

अब कहाँ कंधों को कुछ तकलीफ़ होगी
बोझ सारा दिल पे डाला जा रहा है

बंद रह कर वो भी अब उक्ता गया है
चाबियों के पास ताला जा रहा है