उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye kaun hai jo kanon mein ras ghol raha hai

ये कौन है जो कानों में रस घोल रहा है

یہ کون ہے جو کانوں میں رس گھول رہا ہے

शायर: Faisal Qadri Gunnauri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये कौन है जो कानों में रस घोल रहा है
कोयल की तरह मीठा बहुत बोल रहा है

दौलत से मोहब्बत को मिरी तोल रहा है
वो शख़्स जो मेरे लिए अनमोल रहा है

क्या पाने की रक्खेगा कोई तुझ से तवक़्क़ो'
हाथों में हमेशा तिरे कश्कोल रहा है

सब अच्छी तरह से तुझे पहचान गए हैं
अब तक जो ये चेहरे पे तिरे ख़ोल रहा है

क्या भूल गया है तू अभी पर नहीं मेरे
सय्याद अभी क्यों ये क़फ़स खोल रहा है

ला-‘इल्म भी कर लेते थे अश'आर को मौज़ूँ
'फ़ैसल' ये मिरे शहर का माहौल रहा है