उर्दू शायरी · ग़ज़ल

garche aulad ban ke baiThe hain

गरचे औलाद बन के बैठे हैं

گرچہ اولاد بن کے بیٹھے ہیں

शायर: Faisal Qadri Gunnauri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गरचे औलाद बन के बैठे हैं
फ़ख़्र-ए-अज्दाद बन के बैठे हैं

तुम भी बन जाओ 'इश्क़ में शीरीं
हम तो फ़रहाद बन के बैठे हैं

बन के बैठे हैं वो सरापा ग़ज़ल
और हम दाद बन के बैठे हैं

तू अगरचे हमें भुला बैठा
हम तिरी याद बन के बैठे हैं

पुर-फ़ितन दौर है बचे रहना
लोग जल्लाद बन के बैठे हैं

कैसे माइल न हो कोई 'फ़ैसल'
वो परी-ज़ाद बन के बैठे हैं