उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apne mahbub ka inam nazar mein rakhna

अपने महबूब का इन'आम नज़र में रखना

اپنے محبوب کا انعام نظر میں رکھنا

शायर: Faisal Qadri Gunnauri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपने महबूब का इन'आम नज़र में रखना
वा'दा-ए-वस्ल की वो शाम नज़र में रखना

तू मुझे प्यार से आवाज़ लगाने के लिए
ख़ूबसूरत सा कोई नाम नज़र में रखना

रोज़ 'आएद नया क़ानून जो कर देते हो
इस नए काम का अंजाम नज़र में रखना

अपने वा'दे को अरे जान-ए-जहाँ भूल गए
मेरा वा'दा मिरा पैग़ाम नज़र में रखना

शब-ए-वा'दा न अगर आने की फ़ुर्सत हो तुम्हें
मेरे सर रखने को इल्ज़ाम नज़र में रखना

बादा-कश तेरा न रह जाए कहीं तिश्ना-दहन
उस के हिस्से का भी इक जाम नज़र में रखना

छोड़ कर चल दिए इस शहर को 'फ़ैसल' फिर भी
ये गली कूचा दर-ओ-बाम नज़र में रखना