उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye jo shab ke aiwanon mein ek halchal ek hashr bapa hai

ये जो शब के ऐवानों में इक हलचल इक हश्र बपा है

یہ جو شب کے ایوانوں میں اک ہلچل اک حشر بپا ہے

शायर: Habib Jalib3 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये जो शब के ऐवानों में इक हलचल इक हश्र बपा है
ये जो अंधेरा सिमट रहा है ये जो उजाला फैल रहा है

ये जो हर दुख सहने वाला दुख का मुदावा जान गया है
मज़लूमों मजबूरों का ग़म ये जो मिरे शे'रों में ढला है

ये जो महक गुलशन गुलशन है ये जो चमक 'आलम 'आलम है
मार्कसिज़्म है मार्कसिज़्म है मार्कसिज़्म है मार्कसिज़्म है