उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye hijr meri zat pe ehsan hi to hai

ये हिज्र मेरी ज़ात पे एहसान ही तो है

یہ ہجر میری ذات پہ احسان ہی تو ہے

शायर: Madhavi Shankar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये हिज्र मेरी ज़ात पे एहसान ही तो है
ये रौनक़-ए-हयात तिरा ध्यान ही तो है

खिलने लगेंगे फिर तिरी यादों के ताज़ा फूल
उजड़ा नहीं है दिल मिरा वीरान ही तो है

वो चाहे मुझ को दिल में रखे या निकाल दे
मेहमान हर लिहाज़ से मेहमान ही तो है

बैठी रहो यक़ीन कि कश्ती में 'माधवी'
इक रोज़ थम ही जाएगा तूफ़ान ही तो है