उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jo shaKHs mujh mein baqi hai wo ‘madhwi’ nahin

जो शख़्स मुझ में बाक़ी है वो ‘माधवी’ नहीं

جو شخص مجھ میں باقی ہے وہ مادھویؔ نہیں

शायर: Madhavi Shankar6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जो शख़्स मुझ में बाक़ी है वो ‘माधवी’ नहीं
कुछ साल हो चुके हैं ख़बर आज की नहीं

तुम से ख़फ़ा नहीं हूँ ये आदत ही है मेरी
जब तक बहुत ज़रूरी न हो बोलती नहीं

कह तो रहे हैं बैठिए कुछ देर पास में
और ये भी कह रहे हैं जगह आप की नहीं

सादा-मिज़ाज दिल पे चढ़ाए तमाम रंग
फिर ये शिकायतें भी कि वो सादगी नहीं

क्यों राज़दार कह के उसे आज़माएँ हम
सो अपने दिल की बात उसे भी कही नहीं

अब भी नज़र बचाने की पुर-ज़ोर कोशिशें
या'नी अभी मैं उस के लिए अजनबी नहीं