उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jazbe tamam dil ke hi andar bikhar gae

जज़्बे तमाम दिल के ही अंदर बिखर गए

جذبے تمام دل کے ہی اندر بکھر گئے

शायर: Madhavi Shankar4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जज़्बे तमाम दिल के ही अंदर बिखर गए
इज़हार करना चाहा था अल्फ़ाज़ मर गए

इन मुश्किलों ने काम ये आसान कर दिया
कुछ लोग वक़्त रहते ही दिल से उतर गए

तन्हाइयों को मेरी बहुत काम मिल गया
आवाज़ें अपनी छोड़ के जब दोस्त घर गए

हर चीज़ शहर-ए-इश्क़ में महँगी थी इस क़दर
लौट आए ख़ाली हाथ ही जब जब उधर गए