उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye hansi-KHushi ka mausam ye bahaar ka zamana

ये हँसी-ख़ुशी का मौसम ये बहार का ज़माना

یہ ہنسی خوشی کا موسم یہ بہار کا زمانہ

शायर: Kaleem Aajiz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये हँसी-ख़ुशी का मौसम ये बहार का ज़माना
तिरे वास्ते हक़ीक़त मिरे वास्ते फ़साना

न सँभल सकेगी तुझ से तिरी ज़ुल्फ़-ए-ता-ब-शाना
मैं अभी से देखता हूँ जो दिखाएगा ज़माना

जो तिरी ज़बाँ से निकला वही बन गया फ़साना
मिरे दिल की धड़कनों से रहा बे-ख़बर ज़माना

मिरी ख़ानुमाँ-ख़राबी का जहाँ में है फ़साना
ये वो हादिसा है जिस को न भुला सका ज़माना

मैं निगाह-ए-बाग़बाँ में कोई और हो गया हूँ
अभी चार दिन हुए हैं कि जला है आशियाना

तुझे ऐ ग़म-ए-मोहब्बत इधर आ गले लगा लूँ
न तिरा कहीं गुज़र है न मिरा कहीं ठिकाना

मैं हूँ वो ग़रीब 'आजिज़' कि गुलों की अंजुमन में
मिरे पैरहन के टुकड़ों का बना है शामियाना