उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yak-ba-yak jo kisi ka KHayal aa gaya

यक-ब-यक जो किसी का ख़याल आ गया

یک بیک جو کسی کا خیال آ گیا

शायर: Parkash Nath Parvez5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यक-ब-यक जो किसी का ख़याल आ गया
रूह बे-ख़ुद हुई दिल को हाल आ गया

दहर से रस्म-ए-मह्र-ओ-वफ़ा उठ गई
आदमिय्यत में कैसा ज़वाल आ गया

कोई देखे तिरे हुस्न की साहिरी
जिस ने देखा तुझे उस को हाल आ गया

पड़ गई जब किसी की निगाह-ए-करम
मेरे भौओं में रंग-ए-कमाल आ गया

पूछते क्या हो 'परवेज़' की दास्ताँ
उन की महफ़िल से हो कर निढाल आ गया