उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yahi kaghaz yahi qalam hoga

यही काग़ज़ यही क़लम होगा

یہی کاغذ یہی قلم ہوگا

शायर: Sabiha Khan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यही काग़ज़ यही क़लम होगा
रोज़ इक वाक़िआ' रक़म होगा

अभी भीगेंगी और भी पलकें
अभी आँचल कुछ और नम होगा

मेरी हालत उसे न बतलाना
वो सुनेगा तो उस को ग़म होगा

मेरे ख़्वाबों का मेरी आँखों में
क्या वजूद और क्या अदम होगा

उस से मिलना बहुत ज़रूरी है
दर्द कुछ तो 'सबीहा' कम होगा