उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaam hai un ka jafa wo ba-wafa kahne ko hain

काम है उन का जफ़ा वो बा-वफ़ा कहने को हैं

کام ہے ان کا جفا وہ با وفا کہنے کو ہیں

शायर: Sabiha Khan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

काम है उन का जफ़ा वो बा-वफ़ा कहने को हैं
देते हैं जो दर्द-ए-दिल अहल-ए-शिफ़ा कहने को हैं

हम तो समझे थे वो साहिल पर उतारेंगे हमें
डाल दी नाव भँवर में ना-ख़ुदा कहने को हैं

फ़ासलों से कम न होंगे रूह के रिश्ते कभी
वो हमेशा दिल में हैं दिल से जुदा कहने को हैं

मुनफ़रिद उन की मोहब्बत मुनफ़रिद उन की वफ़ा
दूरियाँ रखते हैं फिर भी हम-नवा कहने को हैं

उन की इक अबरू की जुम्बिश भी सुख़न-वर है बहुत
है ज़बाँ भी उन के मुँह में मुद्द'आ कहने को हैं

दूसरों को रास्ता दिखलाएँगे वो किस तरह
राह-ए-गुम-कर्दा हैं ख़ुद और रहनुमा कहने को हैं

हो गई है आगही उन से 'सबीहा; इस क़दर
जान लेती हूँ मैं इतना अब वो क्या कहने को हैं