उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yahan yun hi nahin pohncha hun main

यहाँ यूँ ही नहीं पहुँचा हूँ मैं

یہاں یوں ہی نہیں پہنچا ہوں میں

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यहाँ यूँ ही नहीं पहुँचा हूँ मैं
मुसलसल रात दिन दौड़ा हूँ मैं

तिरी ज़ंजीर का हिस्सा हूँ मैं
रिहा हो भी नहीं सकता हूँ मैं

तुम्हारी ओट में जितना हूँ मैं
बस उतना ही नज़र आता हूँ मैं

तुम्हारे सामने बैठा हूँ मैं
यही तो सोच कर ज़िंदा हूँ मैं

डराता है ख़ुदा से जब कोई
ख़ुदा के पीछे छुप जाता हूँ मैं

परेशाँ धूप करती है मुझे
शिकायत चाँद से करता हूँ मैं

बहुत कुछ कहना पड़ता हो जहाँ
वहाँ पर कुछ नहीं कहता हूँ मैं

मना लेगी उसे मा'लूम है
अभी सच-मुच नहीं रूठा हूँ मैं