उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yahan jaan par bani hai yar mere

यहाँ जाँ पर बनी है यार मेरे

یہاں جاں پر بنی ہے یار میرے

शायर: Fahmi Badayuni8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यहाँ जाँ पर बनी है यार मेरे
तुझे अपनी पड़ी है यार मेरे

मिरी आँखों में जो महँगी जगह थी
ग़मों ने घेर ली है यार मेरे

दरारें हैं जो ये दीवार-ओ-दर में
ये बुनियादी कमी है यार मेरे

मिरी हालत पे क्यों हैरत-ज़दा है
मोहब्बत हो गई है यार मेरे

ख़ुदी पर शे'र कहना चाहता हूँ
कोई बीड़ी पड़ी है यार मेरे

ज़बानी तीर फेंके जा रहा हूँ
कमाँ टूटी पड़ी है यार मेरे

न उठ जाए कोई दीवार घर में
तराज़ू आ चुकी है यार मेरे

सितमगर ने मुझे बर्बाद कर के
मु'आफ़ी माँग ली है यार मेरे