उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaad teri jo kabhi aati hai bahlane ko

याद तेरी जो कभी आती है बहलाने को

یاد تیری جو کبھی آتی ہے بہلانے کو

शायर: Ehsan Darbhangavi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

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याद तेरी जो कभी आती है बहलाने को
और दीवाना बना जाती है दीवाने को

तुम मोहब्बत-भरी नज़रों से उसे देख तो लो
नींद काँटों पे भी आ जाती है दीवाने को

हम बताएँगे तुम्हें शाना-ओ-गेसू के रुमूज़
ख़त्म कर लो हरम-ओ-दैर के अफ़्साने को

उस को महफ़िल में जो देखा तपिश-ए-ग़म का शरीक
ले लिया शम्अ' ने आग़ोश में परवाने को

बादा-कश वाइ'ज़-ए-कज-फ़हम से क्या बहस करें
उस ने देखा है बहुत दूर से मयख़ाने को

आप ज़ुल्फ़ अपनी सँवारा किए और दुनिया ने
आप से छीन लिया आप के दीवाने को

जब न 'एहसान' रहेगा न कहानी उस की
आप दोहराएँगे 'एहसान' के अफ़्साने को