उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ab asir-e-zulf-e-parishan nahin raha

दिल अब असीर-ए-ज़ुल्फ़-ए-परीशाँ नहीं रहा

دل اب اسیر زلف پریشاں نہیں رہا

शायर: Ehsan Darbhangavi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल अब असीर-ए-ज़ुल्फ़-ए-परीशाँ नहीं रहा
जब अपना ग़म हुआ ग़म-ए-जानाँ नहीं रहा

शाख़ें कुछ इस तरह से झुक आईं मिरी तरफ़
मुझ को लिहाज़-ए-तंगी-ए-दामाँ नहीं रहा

दीवाने रखते आप की बख़िया-गरी की लाज
मुश्किल ये आ पड़ी है कि दामाँ नहीं रहा

अक़्ल-ओ-जुनूँ में सुल्ह करा दी ख़िज़ाँ ने फिर
गुलशन में कोई चाक-गरेबाँ नहीं रहा

ऐ पासबान-ए-पर्दा-ए-औहाम होशियार
दैर-ओ-हरम की क़ैद में इंसाँ नहीं रहा

वो वलवले हैं अब न तबस्सुम न क़हक़हे
जिस से मिले थे आप वो 'एहसाँ' नहीं रहा