उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hijab aane laga ab to bala-e-asmani ko

हिजाब आने लगा अब तो बला-ए-आसमानी को

حجاب آنے لگا اب تو بلائے آسمانی کو

शायर: Ehsan Darbhangavi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हिजाब आने लगा अब तो बला-ए-आसमानी को
ख़ुदा रक्खे सलामत तेरे नाज़-ए-बाग़बानी को

मुक़य्यद जो रखे लफ़्ज़ों की दुनिया में मआ'नी को
सलाम उस शेर-गोई को सलाम उस शेर-ख़्वानी को

मोहब्बत किर्दगार-ए-ग़म है ग़म तख़्लीक़ करती है
मोहब्बत करने वाले भूल जाएँ शादमानी को

शिकायत तो मोहब्बत ही का इक तब्ई नतीजा है
मोहब्बत ही हवा देती है हर इक बद-गुमानी को

हमें ज़ुल्फ़ों के साए में मयस्सर किस तरह होती
इक ऐसी धूप जो सरगर्म रखती नौजवानी को

ग़म-ए-दुनिया तो क्या 'एहसाँ' ग़म-ए-जानाँ ने कब बख़्शा
इक ऐसा दर्द जो बेदार कर दे ज़िंदगानी को

गरेबाँ चाक है 'एहसान' तो फ़िक्र-ए-रफ़ू क्यों है
कोई बर्बाद करता है मोहब्बत की निशानी को