उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo sirf qisse kahaniyon ke muamle the charagh rakh de

वो सिर्फ़ क़िस्से कहानियों के मुआ'मले थे चराग़ रख दे

وہ صرف قصے کہانیوں کے معاملے تھے چراغ رکھ دے

शायर: Charagh Sharma7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो सिर्फ़ क़िस्से कहानियों के मुआ'मले थे चराग़ रख दे
चराग़ घिसने से कोई जिन-विन नहीं निकलते चराग़ रख दे

हमारी मा'सूमियत तो देखो रख आए दिल हम हुज़ूर-ए-जानाँ
कि जैसे कोई ख़ुदा का बंदा हवा के आगे चराग़ रख दे

किसी के साए को क़ैद करने का इक तरीक़ा बता रहा हूँ
इक उस के आगे चराग़ रख दे इक उस के पीछे चराग़ रख दे

तुझे बहुत शौक़ था मोहब्बत की गर्म लपटों से खेलने का
ले जल गई न हथेली अब ख़ुश कहा था मैं ने चराग़ रख दे

चराग़ ले के भी ढूँडने से चराग़ जैसा नहीं मिलेगा
सो रखनी है तो चराग़ से रख नहीं तो प्यारे चराग़ रख दे

चराग़ रौशन ज़रूर कर तो पर इस से पहले ख़ुदा की ख़ातिर
यहाँ पे फैला है जो अंधेरा समेट ज़ेर-ए-चराग़ रख दे

मैं दिल की बातों में आ गया और उठा के ले आया उस की पायल
दिमाग़ देता रहा सदाएँ चराग़ रख दे चराग़ रख दे