उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mahaz-e-jang se pahle kahin paDaw banao

महाज़-ए-जंग से पहले कहीं पड़ाव बनाओ

محاذ جنگ سے پہلے کہیں پڑاؤ بناؤ

शायर: Charagh Sharma6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

महाज़-ए-जंग से पहले कहीं पड़ाव बनाओ
नदी पे बाँध बनाने से पहले नाव बनाओ

ये रात सिर्फ़ अँधेरी नहीं है सर्द भी है
दिया बना लिया शाबाश अब अलाव बनाओ

बनाना जानते हो तुम तो सब के दिल में जगह
हमारे दिल में बना कर दिखाओ आओ बनाओ

ये संग-ए-मरमरी नाख़ुन ये कत्थई पॉलिश
कि कोई देखे तो कह दे हमारे घाव बनाओ

बनाओ ताज-महल के बजाए ताश-महल
तमाम 'उम्र मोहब्बत करो गिराओ बनाओ

तुम्हारी अच्छी बनेगी हमारे साथ कि तुम
बहाने अच्छे बना लेती हो बनाओ बनाओ