उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab ye gul gulnar kab hai Khaar hai be-kar hai

अब ये गुल गुलनार कब है ख़ार है बे-कार है

اب یہ گل گلنار کب ہے خار ہے بیکار ہے

शायर: Charagh Sharma5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब ये गुल गुलनार कब है ख़ार है बे-कार है
आप ने जब कह दिया बे-कार है बे-कार है

छोड़ कर मतला ग़ज़ल दमदार है बे-कार है
जब सिपह-सालार ही बीमार है बे-कार है

इक सवाल ऐसा है मेरे पास जिस के सामने
ये जो तेरी शिद्दत-ए-इन्कार है बे-कार है

तुझ को भी है चाँद का दीदार करने की तलब
इक दिए को रौशनी दरकार है बे-कार है

मय-कदे के मुख़्तलिफ़ आदाब होते हैं 'चराग़'
जो यहाँ पर साहब-ए-किरदार है बे-कार है