उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo rahe duniya mein ek dilkash nagine ki tarah

वो रहे दुनिया में इक दिलकश नगीने की तरह

وہ رہے دنیا میں اک دل کش نگینے کی طرح

शायर: Om Prakash Laghar7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो रहे दुनिया में इक दिलकश नगीने की तरह
हम रहे बाहर मकाँ से एक ज़ीने की तरह

दुश्मनी होती है अक्सर दोस्तों के दरमियाँ
ये भी इक रिश्ता है तूफ़ाँ और सफ़ीने की तरह

क्यों कहो उस आदमी को तुम ज़ईफ़-ओ-ना-तवाँ
ख़ून-ए-दिल जिस ने बहाया हो पसीने की तरह

क्या कशिश पाई है तेरे हुस्न-ए-आलम-सोज़ ने
तू नज़र आता है ज़ेवर में नगीने की तरह

जब कहीं आया है गुलशन में बहारों पर निखार
ख़ून जब हम ने बहाया है पसीने की तरह

कैफ़ियत शाम-ए-जुदाई की न पूछ ऐ हम-नशीं
एक पल बिरहन को लगता है महीने की तरह

क़ादिर-ए-मुतलक़ की हो 'लाग़र' अगर चश्म-ए-करम
तैरते देखे हैं पत्थर भी सफ़ीने की तरह