उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo mujh mein tha nihan main dekhta kya

वो मुझ में था निहाँ मैं देखता क्या

وہ مجھ میں تھا نہاں میں دیکھتا کیا

शायर: Hafeez Shahid10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो मुझ में था निहाँ मैं देखता क्या
पस-ए-दीवार-ए-जाँ मैं देखता क्या

किताब-ए-ज़िंदगी ज़ेर-ए-नज़र थी
हदीस-ए-दिलबराँ मैं देखता क्या

मुझे चलना था अपने रास्ते पर
निशान-ए-रफ़्तगाँ मैं देखता क्या

नज़र में था वो महताब-ए-तमन्ना
जमाल-ए-कहकशाँ मैं देखता क्या

फ़ना की ज़द पे था बाज़ार-ए-दुनिया
यहाँ सूद-ओ-ज़ियाँ मैं देखता क्या

मिरी आँखें भरी थीं आँसुओं से
सर-ए-शहर-ए-फ़ुग़ाँ मैं देखता क्या

ठिकाना था मिरा दश्त-ए-जुनूँ में
ख़िरद की बस्तियाँ मैं देखता क्या

मिरी मजबूरियाँ भी कम नहीं थीं
तिरी मजबूरियाँ मैं देखता क्या

उसे जब इम्तिहाँ लेना नहीं था
निसाब-ए-इम्तिहाँ मैं देखता क्या

मिरी पर्वाज़ थी 'शाहिद' फ़लक पर
ज़मीं की पस्तियाँ मैं देखता क्या