उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo KHwabon mein to aana chahta hai

वो ख़्वाबों में तो आना चाहता है

وہ خوابوں میں تو آنا چاہتا ہے

शायर: Aaquib Shaad5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो ख़्वाबों में तो आना चाहता है
मगर नींदें उड़ाना चाहता है

जिसे मैं ने बचाया ज़ुल्मतों से
दिया मेरा बुझाना चाहता है

उसे कहना तुम्हारा हाल सुन कर
कोई आँसू बहाना चाहता है

लबों से कुछ भी कहता ही नहीं है
वो आँखों से जताना चाहता है

वो दा'वे अच्छे दिन के करके 'आकिब'
हमें पागल बनाना चाहता है