उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum jo guzre hue lamhon ki taraf dekhte hain

हम जो गुज़रे हुए लम्हों की तरफ़ देखते हैं

ہم جو گزرے ہوئے لمحوں کی طرف دیکھتے ہیں

शायर: Aaquib Shaad6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम जो गुज़रे हुए लम्हों की तरफ़ देखते हैं
ऐसा लगता है कि सदियों की तरफ़ देखते हैं

जिन को मालूम है नींदों के उजड़ने का अज़ाब
जागती आँख से ख़्वाबों की तरफ़ देखते हैं

याद आता है हमें आप का चेहरा अक्सर
हम अगर चाँद-सितारों की तरफ़ देखते हैं

मुंतज़िर होंगे कई दिन से किसी के शायद
लोग हसरत से जो रस्तों की तरफ़ देखते हैं

उस की इक बार नज़र पड़ने पे मग़रूर न बन
लोग बाज़ार में कितनों की तरफ़ देखते हैं

ऐसी तरतीब से ज़ख़्मों को सिया है मैं ने
चारागर ग़ौर से टाँकों की तरफ़ देखते हैं