उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo kahan hai kitab ke andar

वो कहाँ है किताब के अन्दर

وہ کہاں ہے کتاب کے اندر

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो कहाँ है किताब के अन्दर
जो लिखा था निसाब के अन्दर

मैं ने ढूँडा शराब के अन्दर
और नशा था नक़ाब के अन्दर

आज भाई का फ़ोन आ ही गया
कुछ कमी थी हिसाब के अन्दर

सारा अफ़्साना रंग-ओ-बू का था
कुछ न निकला गुलाब के अन्दर

अपने अपने सवाल होते हैं
अपने अपने जवाब के अन्दर

मेरी दीवानगी पे इक बुढ़िया
हँस पड़ी माहताब के अन्दर

घूमना छोड़ दे ज़मीन अगर
गिर पड़े आफ़्ताब के अन्दर