उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo jo tumhaari majburi hai

वो जो तुम्हारी मजबूरी है

وہ جو تمہاری مجبوری ہے

शायर: Fahmi Badayuni7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो जो तुम्हारी मजबूरी है
वही तो सारी मजबूरी है

जो भी तुम्हारी मजबूरी है
पहले हमारी मजबूरी है

हुस्न तुम्हारी मजबूरी है
'इश्क़ हमारी मजबूरी है

ज़िल्ल-ए-इलाही रो नहीं सकते
कुछ दरबारी मजबूरी है

तस्वीरों से बातें करना
कितनी प्यारी मजबूरी है

चाँद से याराना है अपना
शब-बेदारी मजबूरी है

हल्की बातें करता है वो
कोई भारी मजबूरी है