उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo jitne dur hain utne hi mere pas bhi hain

वो जितने दूर हैं उतने ही मेरे पास भी हैं

وہ جتنے دور ہیں اتنے ہی میرے پاس بھی ہیں

शायर: Faiz ul Hasan Khayal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो जितने दूर हैं उतने ही मेरे पास भी हैं
ये और बात है ख़ुश हैं मगर उदास भी हैं

ये देखना है हमें किस का ज़ौक़ कैसा है
यहाँ शराब भी है ज़हर के गिलास भी हैं

उन्ही पे तोहमत-ए-दीवानगी लगाते हो
जो इत्तिफ़ाक़ से महफ़िल में रू-शनास भी हैं

जो रौशनी के लिबादे को ओढ़ कर आए
शब-ए-सियाह के वो मातमी लिबास भी हैं

तुम अपने शहर में अम्न-ओ-अमाँ की बात करो
जहाँ सुकूँ है वहाँ लोग बद-हवास भी हैं

ग़ज़ल के साज़ हैं फ़ैज़-उल-हसन-'ख़याल' जहाँ
वहाँ पे आह ब-लब भी हैं महव-ए-यास भी हैं