उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo jalwe jo hijab-e-naz se mahfil mein aate hain

वो जल्वे जो हिजाब-ए-नाज़ से महफ़िल में आते हैं

وہ جلوے جو حجاب ناز سے محفل میں آتے ہیں

शायर: Zaheen Shah Taji6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो जल्वे जो हिजाब-ए-नाज़ से महफ़िल में आते हैं
मिरे दिल से निकलते हैं कि मेरे दिल में आते हैं

फ़ना पहला अदब है शर्त-ए-अव्वल बज़्म-ए-जानाँ में
जो अपने आप से गुज़रें वो इस महफ़िल में आते हैं

खुली आँखों से 'आलम पर गुमान-ए-'आलम-ए-दिल है
जब आँखें बंद करता हूँ नज़र वो दिल में आते हैं

कोई सादा-दिली-ए-शौक़ को ये बात समझा दे
पयाम-ए-हुस्न होते हैं जो अरमाँ दिल में आते हैं

ख़ुदी के जौहर आसानी में इंसाँ पर नहीं खुलते
हम अपने सामने खुल कर फ़क़त मुश्किल में आते हैं

'ज़हीन' अल्लाह को मैं देखता हूँ हुस्न-ए-जानाँ में
नज़र ख़ुर्शीद के जल्वे मह-ए-कामिल में आते हैं