उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo humse ho gaya hai be-KHabar kuchh

वो हम से हो गया है बे-ख़बर कुछ

وہ ہم سے ہو گیا ہے بے خبر کچھ

शायर: Hafeez Shahid7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो हम से हो गया है बे-ख़बर कुछ
बदलते मौसमों का है असर कुछ

कहीं साए में रुक कर क्या करेंगे
चलो अब तेज़ बाक़ी है सफ़र कुछ

हवा-ए-तुंद का ये काम देखो
न छोड़ा शाख़ पर बाक़ी समर कुछ

भटकते फिर रहे हैं रास्तों में
बसारत से तही अहल-ए-नज़र कुछ

अगरचे शहर तो अपना है लेकिन
पराए से हैं क्यूँ दीवार-ओ-दर कुछ

अभी दिल में उड़ानों की है ख़्वाहिश
सलामत हैं हमारे बाल-ओ-पर कुछ

अभी 'शाहिद' लुटाओ ग़म की दौलत
अभी हैं आँख में लाल-ओ-गुहर कुछ