उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo bekali hai koi rasta sujhai na de

वो बेकली है कोई रास्ता सुझाई न दे

وہ بیکلی ہے کوئی راستہ سجھائی نہ دے

शायर: Badr Jameel5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो बेकली है कोई रास्ता सुझाई न दे
वो शोर है कि ख़ुद अपनी सदा सुनाई न दे

मैं क्या करूँगा भला जा के उस बुलंदी पर
जहाँ से मेरा ही साया मुझे दिखाई न दे

जो मुझ को दर्द के अंधे कुएँ में फेंक आए
मिरे वजूद को वो कर्ब-आश्नाई न दे

न जाने कौन है मुझ में जो हर घड़ी मुझ को
कोई सुझाओ सा देता रहे दिखाई न दे

'जमील' वक़्त से आगे निकल गए हम लोग
ज़माना अब हमें इल्ज़ाम-ए-ना-रसाई न दे