उर्दू शायरी · ग़ज़ल

soz-e-junun ne waqt se Darne nahin diya

सोज़-ए-जुनूँ ने वक़्त से डरने नहीं दिया

سوز جنوں نے وقت سے ڈرنے نہیں دیا

शायर: Badr Jameel5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

सोज़-ए-जुनूँ ने वक़्त से डरने नहीं दिया
आसान रास्तों से गुज़रने नहीं दिया

साहिल पे जा उतरना तो लम्हों की बात थी
एक बे-दिली थी जिस ने उभरने नहीं दिया

घेरा कुछ इस तरह से ग़म-ए-रोज़गार ने
ख़ुद अपने आप में भी उतरने नहीं दिया

ऊँची हवेलियों ने भी क्या ज़ुल्म ढाए हैं
सूरज भी आँगनों में उतरने नहीं दिया

एक सोज़-ए-अंदरूँ ने हर इक मोड़ पर 'जमील'
सच्चाइयों से हम को मुकरने नहीं दिया