उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo aks mauja-e-gul tha chaman chaman mein raha

वो 'अक्स मौजा-ए-गुल था चमन चमन में रहा

وہ عکس موجۂ گل تھا چمن چمن میں رہا

शायर: Parveen Shakir6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो 'अक्स मौजा-ए-गुल था चमन चमन में रहा
वो रंग रंग में उतरा किरन किरन में रहा

वो नाम हासिल-ए-फ़न हो के मेरे फ़न में रहा
कि रूह बन के मिरी सोच के बदन में रहा

सुकून-ए-दिल के लिए हम कहाँ कहाँ न गए
मगर ये दिल कि सदा उस की अंजुमन में रहा

वो शहर वालों के आगे कहीं मोहज़्ज़ब था
वो एक शख़्स जो शहरों से दूर बन में रहा

बता गया है मुझे कैसी अन-कही बातें
वो ए'तिराफ़ जो उस आँख की थकन में रहा

चराग़ बुझते रहे और ख़्वाब जलते रहे
'अजीब तर्ज़ का मौसम मिरे वतन में रहा