उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aawaz ke hamrah sarapa bhi to dekhun

आवाज़ के हमराह सरापा भी तो देखूँ

آواز کے ہم راہ سراپا بھی تو دیکھوں

शायर: Parveen Shakir6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आवाज़ के हमराह सरापा भी तो देखूँ
ऐ जान-ए-सुख़न मैं तेरा चेहरा भी तो देखूँ

दस्तक तो कुछ ऐसी है कि दिल छूने लगी है
इस हब्स में बारिश का ये झोंका भी तो देखूँ

सहरा की तरह रहते हुए थक गईं आँखें
दुख कहता है मैं अब कोई दरिया भी तो देखूँ

ये क्या कि वो जब चाहे मुझे छीन ले मुझ से
अपने लिए वो शख़्स तड़पता भी तो देखूँ

अब तक तो मिरे शे'र हवाला रहे तेरा
अब मैं तिरी रुस्वाई का चर्चा भी तो देखूँ

अब तक जो सराब आए थे अनजाने में आए
पहचाने हुए रस्तों का धोका भी तो देखूँ