उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wo aaenge wo aate hain wo aane ko hain wo aae

वो आएँगे वो आते हैं वो आने को हैं वो आए

وہ آئیں گے وہ آتے ہیں وہ آنے کو ہیں وہ آئے

शायर: Zaheen Shah Taji6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वो आएँगे वो आते हैं वो आने को हैं वो आए
तसव्वुर को वो बहलाएँ तसव्वुर हम को बहलाए

वो चमका चाँद छिटकी चाँदनी तारे निकल आए
वो क्या आए ज़मीं पर आसमाँ ने फूल बरसाए

अज़ल से ता-अबद है जल्वा फ़रमा हुस्न-ए-सद-शेवा
वही साहिब-नज़र है जो बराबर देखता जाए

कहाँ इंसाँ कहाँ 'अक़्ल-ओ-ख़िरद की बेड़ियाँ तौबा
ज़रा भी 'अक़्ल हो तो आदमी दीवाना हो जाए

वजूद-ए-नूर पर मौक़ूफ़ हैं आसार-ए-ज़ुल्मत भी
न होगी रौशनी तो फिर कहाँ जाएँगे ये साए

'ज़हीन' आसूदगी राह-ए-तलब में है ज़ियाँ-कारी
हज़ारों कोस हैं वो दूर जो इक लम्हा सुसताए