उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waqt ki zambil palTi aur us tak ja gira

वक़्त की ज़म्बील पल्टी और उस तक जा गिरा

وقت کی زنبیل پلٹی اور اس تک جا گرا

शायर: Osama Khalid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वक़्त की ज़म्बील पल्टी और उस तक जा गिरा
जिस्म का कश्कोल जिस ने बद-दुआ' से भर दिया

आँगनों तक आ गई थी रौशनी तस्वीर की
धूप का फैला हुआ था शाम जैसा ज़ाइक़ा

माँद पड़ने लग गई सारे चराग़ों की लपक
किस ने बुझते साए को मेरी जगह होने दिया

राएगाँ होते हुए दिन को मिली रंगत की रात
सुब्ह रौशन-दान ने मंज़र को गदला कर दिया

पहले मैं उस अक्स की पहचान तक पहुँचा फ़क़त
और फिर वो आइना-ख़ाना भी मुझ में ज़म हुआ