उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dard tera tha tere yar se lag kar roya

दर्द तेरा था तिरे यार से लग कर रोया

درد تیرا تھا ترے یار سے لگ کر رویا

शायर: Osama Khalid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्द तेरा था तिरे यार से लग कर रोया
या'नी बीमार था बीमार से लग कर रोया

सख़्त कोहराम-ज़दा शख़्स था मेरा हमदर्द
यूँ लगा जैसे मैं बाज़ार से लग कर रोया

चार सू फैल गया ज़र्द उदासी का हिसार
कोई दर से कोई दीवार से लग कर रोया

किस ने भड़काई मिरे जिस्म में तस्लीम की आग
कौन मुझ में तिरे इंकार से लग कर रोया

नींद बेचैन थी बीमार की आँखों के लिए
ख़्वाब का ज़ख़्म अज़ादार से लग कर रोया