उर्दू शायरी · ग़ज़ल

darun-e-KHwab koi shakl muskuraati hai

दरून-ए-ख़्वाब कोई शक्ल मुस्कुराती है

درون خواب کوئی شکل مسکراتی ہے

शायर: Osama Khalid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दरून-ए-ख़्वाब कोई शक्ल मुस्कुराती है
मैं चुप रहूँ तो मिरे साथ गुनगुनाती है

क़ज़ा से उलझे हुए सोगवार हाथों में
हमारे नाम की मेहंदी लगाई जाती है

ये रुख़्सती का समय भी अजब है आख़िर-ए-शब
कि चूड़ियों की खनक और बढ़ती जाती है

जमाल और किसी का है मेरे चेहरे पर
बदन में और कोई रूह तिलमिलाती है

ये रात सहमी सिसकती हुई दुल्हन की तरह
लिपटती जाती है शर्मिंदा होती जाती है