उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aankhon mein chand KHwab-numa tir gaD gae

आँखों में चंद ख़्वाब-नुमा तीर गड़ गए

آنکھوں میں چند خواب نما تیر گڑ گئے

शायर: Osama Khalid5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आँखों में चंद ख़्वाब-नुमा तीर गड़ गए
बहते लहू के डर से पपोटे सिकुड़ गए

मैं आग के क़रीब से गुज़रा न था कभी
ठंडक की नर्म धूप से धागे उधड़ गए

कुछ बेड़ियों ने ख़स्ता किया जिस्म-ओ-जान को
मंज़र तक आते आते मिरे पाँव झड़ गए

कैसी दलीलें कैसी मुनाजात कुछ नहीं
तुझ से बिछड़ना था जिन्हें ख़ुद से बिछड़ गए

माँगी न थी दुआ कभी मैं ने फिर एक शब
उठने की देर थी कि मिरे हाथ झड़ गए