उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waqt ki aag se shoalon se sharar se ho kar

वक़्त की आग से शो'लों से शरर से हो कर

وقت کی آگ سے شعلوں سے شرر سے ہو کر

शायर: Om Krishn Rahat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वक़्त की आग से शो'लों से शरर से हो कर
बारहा गुज़रा हूँ इस राहगुज़र से हो कर

राह-ए-दिल इस लिए पामाल नज़र आती है
नित-नई ख़्वाहिशें जाती हैं इधर से हो कर

इसी बाइ'स नहीं होता है तअज्जुब इन पे
हादसे गुज़रे हैं सब मेरी नज़र से हो कर

इतना मालूम रहे शोरिश-ए-हस्ती तुझ को
कश्ती-ए-ज़ीस्त भी निकली है भँवर से हो कर

जो अभी तक मिरे होंटों पे नहीं आई थी
वो दुआ लौट भी आई तिरे दर से हो कर

अपने आपे में नहीं आया है पहरों 'राहत'
जब भी दिल लौटा है उम्मीद-नगर से हो कर