उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waqt ke sath sath chalna tha

वक़्त के साथ साथ चलना था

وقت کے ساتھ ساتھ چلنا تھا

शायर: A.R. Sahil 'Aleeg'5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वक़्त के साथ साथ चलना था
ख़ुद को थोड़ा बहुत बदलना था

इस में ग़लती घड़ी की थोड़ी है
वक़्त था वक़्त पर निकलना था

उस की फ़ितरत पे तंज़ मत कीजे
रंग गिरगिट को तो बदलना था

सब फिसलते हैं इस जवानी में
कहने वाले तुझे सँभलना था

तर्क-ए-उल्फ़त की क्या ज़रूरत थी
गर तुम्हें ज़ाइक़ा बदलना था