उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waqt ka sans bhi tufan ka Thahraw lage

वक़्त का साँस भी तूफ़ान का ठहराव लगे

وقت کا سانس بھی طوفان کا ٹھہراؤ لگے

शायर: Zafar Ghauri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वक़्त का साँस भी तूफ़ान का ठहराव लगे
इस कड़ी रुत में कहाँ टूटी हुई नाव लगे

हर नफ़स रूह में इक ज़हर-भरा घाव लगे
हर सदा चीख़ते अल्फ़ाज़ का पथराव लगे

ख़ेमा-ज़न होगी उसी जा पे सवारी गुल की
ऐ सबा दश्त में फिर ख़ून का छिड़काव लगे

फिर से तज्दीद-ए-सितम की नई सूरत निकली
हद से बदला हुआ अहबाब का बरताव लगे

लोग कहते हैं वफ़ा जिन्स-ए-गिराँ-माया है
शहर में ले तो चलें देख लें क्या भाव लगे

हर अदा उस की 'ज़फ़र' जू-ए-रवाँ की मानिंद
दिल में झाँकूँ तो समंदर का सा फैलाव लगे