उर्दू शायरी · ग़ज़ल

waqt ka daman tang hai lekin mera daman tang nahin

वक़्त का दामन तंग है लेकिन मेरा दामन तंग नहीं

وقت کا دامن تنگ ہے لیکن میرا دامن تنگ نہیں

शायर: Ejaz Rahmani7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वक़्त का दामन तंग है लेकिन मेरा दामन तंग नहीं
धूप के डर से जो उड़ जाए रंग वो मेरा रंग नहीं

बेदारी का 'आलम मुझ को ख़्वाब का मौसम लगता है
हैरत है आज उन हाथों में आईना है संग नहीं

बहने वाला सड़कों पर ये किस का लहू है मेरा है
मैं तो अपना क़ातिल ख़ुद हूँ ग़ैर से मेरी जंग नहीं

चीख़ उठेंगे सारे पर्बत तेशा कोई लाए तो
ऐसा कौन सा पत्थर है जिस पत्थर में आहंग नहीं

जब तक उस के क़ुर्ब की ख़ुशबू हासिल थी मैं ज़िंदा था
वो जो नहीं तो यूँ लगता है कोई भी मेरे संग नहीं

पहले अपने क़द को देखें फिर मुझ पर तन्क़ीद करें
उन का ज़िक्र भी क्यों करते हो जो मेरे पासंग नहीं

होंटों पर कुछ लफ़्ज़ शिकस्ता जुमले भी बे-रब्त 'ए'जाज़'
दिल की बात सुनाऊँ कैसे कहने का भी ढंग नहीं